Wednesday, July 8, 2020

महामारी क्यों आती है?

प्रस्तावना
जब किसी रोग का प्रकोप कुछ समय पहले की अपेक्षा बहुत अधिक होता तो उसे 'महामारी कहते हैं। महामारी किसी एक स्थान पर सीमित होती है। किन्तु यदि यह दूसरे देशों और दूसरे महाद्वीपों में भी पसर जाए तो उसे 'सार्वदेशिक रोग' कहते हैं। इसके ‌‌‌नुकसान निम्न‌ है महामारी का मुख्य कारण जीवाणु अथवा विषाणु होते हैं।
भारत में महामारियों और अकाल का प्रकोप

भारत मे सबसे अधिक कोरोना प्रभावित राज्य
कोरोना संक्रमित रोगियों के मामले में महाराष्ट्र देश का नंबर-1 राज्य है. अकेले मुंबई में इसके मरीज़ों की संख्या कुछ राज्यों के कुल रोगियों से अधिक है.
मौजूदा सरकार का रवैया मानवीय भी वैज्ञानिक भी ।

मौजूदा भारत सरकार ने लगातार वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल कर रही है. देश के भीतर मास्क जैसी जरूरी चीज को एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत ला दिया गया है ताकि इसकी कालाबाजारी न हो सके और यह सभी को मुहैया करवाए जा सकें. सरकारी से लेकर प्राइवेट लैब तक कोविड-19 की टेस्टिंग हो रही है.

हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं. जरूरी चीजें लोगों तक पहुंचाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं. बड़ी तादाद में आइसोलेशन रूम्स बनाए गए हैं. लोग एक दूसरे के संपर्क में आकर संक्रमण के वाहक न बनें इसलिए एपिडेमिक डिसीज एक्ट -1897 लागू जरूर कर दिया गया है लेकिन सरकार इस संकट की घड़ी में लोगों की हर संभव मदद करने के लिए सभी कदम उठा रही है.
महामारियां आने के मुख्य कारण
(1) महामारियां आने का पहला कारण आध्यात्मिक शक्तियों का रुष्ट होना।
(2)दूसरा कारण है भक्ति का ह्वास।
(3)तीसरा कारण है पापकर्मों की बढोतरी।
(4)चौथा कारण है प्राकृतिक असंतुलन।
महामारियों से बचने का उपाय-
(1)शास्त्रानुकूल सतभक्ति
(2)हमारे कर्मो मे पापकर्मों की अपेक्षा पुण्यकर्मों की बढोतरी हो।
(3)आध्यात्मिक शक्तियों का प्रसन्न होना।
अब यह कैसे सम्भव हो?
इस वर्तमान समय में बचाने वाला एक ही संत दिखाई दे रहा है वो है संत रामपाल जी
संत रामपाल जी ही कैसे बचा सकते हैं अन्य संत क्यों नहीं?
इसके मुख्य कारण है-
(1) संत रामपाल जी शास्त्रों में प्रमाण देकर सतभक्ति बताते हैं और सतभक्ति शास्त्रानुकूल होती है जिससे आत्माओं मे शक्ति बढती है जिससे सभी आत्माएं परमात्मा की कृपा पात्र बन जाती है जिससे सभी जीव सुखमय जीवन व्यतीत करने लगते हैं।
(2)दूसरा कारण है कि शास्त्रानुकूल सतभक्ति से आध्यात्मिक शक्तियां प्रसन्न होने लगती है जिससे किसी भी प्राणी पर कोई आपदा नही आती है फलस्वरूप सभी प्राणी सुखमय जीवन व्यतीत करने लगते हैं
(3)तीसरा कारण है कि शास्त्रानुकूल सतभक्ति करने से पापकर्मों की अपेक्षा पुण्यकर्मों मे बढोतरी होती रहती है जिस कारण से भी प्राणी सुखी रहते हैं
(4)चौथा कारण है कि संत रामपाल जी पुर्ण परमात्मा के भेजे हुए मसीहा है तथा उन्ही के आदेश से सतभक्ति हेतु नाम दीक्षा प्रदान करते हैं जिससे सभी आत्माओं को बहुत से लाभ होते रहते हैं जिससे नाम दीक्षा प्राप्त प्राणी संत रामपाल जी की मर्यादा रुपी लक्ष्मण रेखा में रहते हैं जिससे उनको काल जाल से निर्भय होकर शास्त्रानुकूल सतभक्ति करते हुए सुख से अपना जीवन व्यतीत करते हैं तथा मरने के बाद मोक्ष प्राप्त करते हैं इसमे तनिक भी शंका नहीं है
इसलिए अपने मनुष्य जीवन को सफल बनाने के लिए संत रामपाल जी से दीक्षा ग्रहण करे और आजीवन मर्यादा मे रहकर सतभक्ति करे और अपने निजधाम(Satlok)चलें।
पहचानो मेरे भाईयों संत रामपाल जी आम इंसान नहीं है और संत रामपाल जी के वेश में   परमात्मा  धरती पर अवतरित है पहचानने में देर मत करो  , यह मनुष्य जीवन बार बार नहीं मिलने वाला।
जानने के लिए देखिए ईश्वर टीवी शाम8:30से9:30तक

Wednesday, July 1, 2020

विश्व गुरु कौन?

विश्व गुरु कौन बनेगा?
इतिहास के पन्नो में भारत को विश्व गुरु यानी की विश्व को पढ़ाने वाला अथवा पूरी दुनिया का शिक्षक कहा जाता था, क्योंकि भारत देश की प्राचीन अर्थव्यवस्था, राजनीती और यहाँ के लोगोंका ज्ञान इतना सम्रद्ध थी कि पूरब से लेकर पश्चिम तक सभी देश भारत के कायल थे।
भारत का वैभव
भारत की सम्रद्धता और धन को देख कर विदेशी लोग इतने लालची हो गए थे कि उन्हें भारत पर आक्रमण करना पड़ा ताकि भारत के धन से अपने भूखे पेट भर सकें।
लेकिन आज हम बात करने वाले है, भारत के विश्वगुरु होने की। 
इसलिए आज हम आप सब के सामने इसी बात को सिद्ध करने वाले हैं कि भारत ही विश्व गुरु कहलाने योग्य है।
भारत में बिभिन्न धर्म और संस्कृति के लोग होने के बावजूद भी सभी एक हैं। जो भारत को अतुल्य बनाती है।
इन सब तथ्यों के अलावा हम जानते हैं कि भारतीय नागरिक विश्व के बिभिन्न देशों में अपने ज्ञान-विज्ञान की मदद से उन्हें सहायता दे रहे हैं, और सबसे ज्यादा भारतीय तो नासा में हैं।  अतः निष्कर्ष निकालते हुए और इन सब बातों को देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत एक बार फिर विश्व गुरु बनने के लिए तैयार है।
अमेरिका और चीन विश्व गुरु नहीं हो सकते क्योंकि इनके पास आध्यात्मिक शक्ति नहीं है और न ही विश्व के लोगों को एकता के सूत्र मे बाँधते है और न ही लोगों को शांति की राह पर लेकर चलते हैं इनका उद्देश्य विश्व के देशों में फूट डालकर अपनी वैश्विक बाजार में शक्ति बढाना है
भारत पुन:विश्वगुरु बनेगा
अत: विश्व के लोगों को शांति व भाईचारे का पाठ पढाने वाला भारत देश में जन्मा संत रामपाल जी महाराज है जो कि विश्व के लोगो शांति व भाईचारे के पाठ पढा रहे हैं यही वो संत है जो लोगों मे फैली बुराईयों को दूर करके लोगों को सुखी कर रहे हैं
(1)संत रामपाल जी महाराज एक ऐसे संत है जो सभी धर्मों के लोगों को अपना शिष्य बनाते हैं तथा उनको सतभक्ति करवाकर अपने निजधाम सतलोक मे ले जाते हैं संत रामपाल जी से पहले यह कार्य किसी भी संत ने नहीं किया।
(2)संत रामपाल जी ही एक ऐसे संत है जो कि हमारे शास्त्रों में छूपे हुए गूढ़ रहस्यों से हमें परिचित करवाया है और लोगों को एक ही ईश्वर की भक्ति बताते हैं जो कि वह कबीर परमात्मा है जो लोगों को सुखी करता है तथा वह हमारी रक्षा के लिए हर जन्म में हमारे साथ रहता है और उसका प्रत्यक्ष साक्षात्कार अपने कई शिष्यों करवाया है यह रहस्य अब तक विश्व में किसी भी संत ने नहीं खोला।
(3)संत रामपाल जी महाराज ही एक ऐसे संत है जो कि विश्व के सम्पूर्ण लोगों को बुराइयों से तथा सभी धर्मों मैं फैले अंधविश्वास को मिटा रहे हैं।जो कि यह कार्य अब तक कोई भी संत नहीं कर पाया।
(4)संत रामपाल जी महाराज एक ऐसे संत है जिनकी शरण में जाने के पश्चात किसी भी प्रकार की कोई बुराई(दहेज, मृत्युभोज,न ही किसी प्रकार का नशा, )तथा अंधविश्वास (जादू टोना, भैरव भूत बैताल की पूजा इत्यादि)नहीं करता है तथा लोगों को सही राह दिखाने के लिए तत्पर रहते हैं 
उपरोक्त विशेषताओं के आधार पर संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य मे भारत ही विश्वगुरु बनेगा इसमें कोई संशय नहीं है
पहचानो मेरे विश्व के लोगों संत रामपाल जी महाराज ही जगत के तारणहार है।
जानने के लिए देखिए ईश्वर टीवी शाम8:30से9:30तक

महामारी क्यों आती है?

प्रस्तावना जब किसी रोग का प्रकोप कुछ समय पहले की अपेक्षा बहुत अधिक होता तो उसे 'महामारी कहते हैं। महामारी किसी एक स्थान पर सीमित होती है...