Sunday, May 31, 2020

5 June कबीर प्रकट दिवस

#Miracles_Of_GodKabir
मृत लड़के कमाल को जीवित करना"
शेखतकी का कहना था कि अगर कबीर अल्लाह है, तो किसी मुर्दे को जीवित कर दे तो अल्लाह मान लूंगा। सुबह एक 10-12 वर्ष की आयु के लड़के का शव पानी में तैरता हुआ आ रहा था। शेखतकी ने जंत्र-मंत्र से प्रयत्न किया लेकिन लड़का जीवित नहीं हुआ। तब कबीर साहेब ने कहा कि हे जीवात्मा जहाँ भी है, कबीर हुक्म से मुर्दे में प्रवेश कर और बाहर आ। इतना कहा ही था कि शव में कम्पन हुई तथा जीवित होकर बाहर आ गया।
"जगन्नाथ के पांडे की कबीर जी द्वारा रक्षा"
जगन्नाथ पुरी में एक रामसहाय पाण्डा खिचड़ी का प्रसाद उतार रहा था। गर्म खिचड़ी उसके पैर पर गिर गई। उस समय कबीर जी अपने करमण्डल से हिम जल रामसहाय पाण्डा के पैर पर डाला। उसके तुरंत बाद राहत मिलते ही पैर ठीक हो गया। उस समय कबीर जी ना होते रामसहाय पाण्डा का पैर जल जाता।
गरीबदास जी देते हैं -
पग ऊपरि जल डालकर, हो गये खड़े कबीर। गरीबदास पंडा जरया, तहां परया योह नीर।।
जगन्नाथ जगदीश का, जरत बुझाया पंड। गरीबदास हर हर करत, मिट्या कलप सब दंड।।
गोरखनाथ से गोष्ठी"
एक बार कबीर परमेश्वर जी और गोरखनाथ जी की गोष्ठी हुई। गोरखनाथ जी गंगा नदी की ओर चल पड़ा। उसमें जा कर छलांग लगाते हुए कबीर जी से कहा कि मुझे ढूंढ दो मैं आपका शिष्य बन जाऊँगा। गोरखनाथ मछली बन कर गए। कबीर साहेब ने उसी मछली को पानी से बाहर निकाल कर सबके सामने गोरखनाथ बना दिया। तब गोरखनाथ कबीर जी के शिष्य बने।

मृत गऊ को जीवित करना"
सिकंदर लोधी ने एक गऊ के तलवार से दो टुकड़े कर दिये। गऊ को गर्भ था और बच्चे के भी दो टुकड़े हो गए। 
तब सिकंदर लोधी राजा ने कहा कि कबीर, यदि तू खुदा है तो इस गऊ को जीवित कर दे अन्यथा तेरा सिर भी कलम कर (काट) दिया जाएगा। साहेब कबीर ने एक बार हाथ गऊ के दोनों टुकड़ों को लगाया तथा दूसरी बार उसके बच्चे के टुकड़ों को लगाया। उसी समय दोनों माँ-बेटा जीवित हो गए। साहेब कबीर ने गऊ से दूध निकाल कर बहुत बड़ी देग (बाल्टी) भर दी
तथा कहा - 
गऊ अपनी अम्मा है, इस पर छुरी न बाह। 
गरीबदास घी दूध को, सब ही आत्म खाय।।
चुटकी तारी थाप दे, गऊ जिवाई बेगि।
गरीबदास दूझन लगी, दूध भरी है देग।।
जानने के लिए देखिए साधना टीवी शाम7:30से8:30तक

#4DaysLeft_KabirPrakatDiwas


Saturday, May 30, 2020

5 June कबीर प्रकट दिवस

#52_Cruelities_On_GodKabir
⛳⛳ ```5 June कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस 

(1)कबीर जी को मारने के लिए उन्हें खूनी हाथी के आगे बांध कर डाला गया।
लेकिन अविनाशी कबीर जी ने हाथी को शेर रूप दिखा दिया। जिससे हाथी भयभीत होकर भाग गया।
सबने कबीर जी की जय जयकार की।

(2)कबीर परमेश्वर को तोप के गोलों से मारने की व्यर्थ चेष्टा"
कबीर जी को मारने के लिए शेखतकी के आदेश पर पहले पत्थर मारे, फिर तीर मारे। परन्तु परमेश्वर की ओर पत्थर या तीर नहीं आया। फिर चार पहर तक तोप यंत्र से गोले चलाए गए।
लेकिन दुष्ट लोग अविनाशी कबीर जी का कुछ नहीं बिगाड़ सके।

(3)दिल्ली के सम्राट सिकंदर लोधी ने जनता को शांत करने के लिए अपने हाथों से हथकड़ियाँ लगाई, पैरों में बेड़ी तथा गले में लोहे की भारी बेल डाली आदेश दिया गंगा दरिया में डुबोकर मारने का। उनको दरिया में फैंक दिया। कबीर परमेश्वर जी की हथकड़ी, बेड़ी और लोहे की बेल अपने आप टूट गयी। परमात्मा जल पर सुखासन में बैठे रहे कुछ नहीं बिगड़ा।

(4)कबीर परमात्मा जब एक बार गंगा दरिया में डुबोने से भी नहीं डूबे तो शेखतकी ने फिर आदेश दिया कि पत्थर बाँधकर पुन: गंगा के मध्य ले जाकर जल में फैंक दो। सब पत्थर बँधन मुक्त होकर जल में डूब गए, परंतु परमेश्वर कबीर जी जल के ऊपर सुखासन लगाए बैठे रहे। नीचे से गंगा जल की लहरें बह रही थी। परमेश्वर आराम से जल के ऊपर बैठे थे।

(5)कबीर साहेब को मारने के लिए शेखतकी ने तलवार से वार करवाये। लेकिन तलवार कबीर साहेब के आर पार हो जाती क्योंकि कबीर साहेब का शरीर पाँच तत्व का नहीं बना था उनका नूरी शरीर था। फिर सभी लोगों ने कबीर साहेब की जय जयकार की।
साहेब कबीर को मारण चाल्या, शेखतकी जलील।
आर पार तलवार निकल ज्या, समझा नहीं खलील।।

(6)उबलते तेल में जलाने की चेष्टा
कबीर जी को जीवित जलाने के लिए उन्हें उबलते तेल के कड़ाहे में डाला गया। लेकिन समर्थ अविनाशी परमात्मा का  बाल भी बांका नहीं हुआ।

(7)"शेखतकी द्वारा कबीर साहेब को गहरे कुँए में डालना"
शेखतकी ने कबीर साहेब को बांध कर गहरे कुँए में डाल दिया, ऊपर से मिट्टी, ईंट और पत्थर से कुँए को पूरा भर दिया। फिर शेखतकी सिकन्दर राजा के पास गया वहां जाकर देखा तो कबीर परमेश्वर पहले से ही विराजमान थे।

(8)कबीर परमेश्वर को शेखतकी ने उबलते हुए तेल में बिठाया। लेकिन कबीर साहेब ऐसे बैठे थे जैसे कि तेल गर्म ही ना हो। सिकन्दर बादशाह ने तेल के परीक्षण के लिए अपनी उंगली डाली, तो उसकी उंगली जल गई। लेकिन अविनाशी कबीर परमेश्वर जी को कुछ भी नहीं हुआ। 

(9)कबीर साहेब जब सत्संग कर रहे थे तब शेखतकी ने सिपाही से कहा कि इनके गले में जहरीला साँप डाल दो लेकिन वो साँप कबीर साहेब के गले में डालते ही सुंदर पुष्पों की माला बन गया। क्योंकि कबीर साहेब पूर्ण परमात्मा थे।

(10)कबीर साहेब सिकंदर लोधी के दरबार में बैठकर सत्संग कर रहे थे तब शेखतकी ने सिपाही से कहा कि लोहे को गर्म करके पिघलाकर पानी की तरह बनाओ और कबीर साहेब पर डालो। ठीक ऐसा ही हुआ जब लोहा गर्म करके पिघलाकर कबीर साहेब पर डाला तब वह फूल बन गए जैसे की मानो फूलों की वर्षा होने लगी। तब सभी ने कबीर साहेब की जय जयकार लगाई।

(11)परमात्मा के शरीर में कीले ठोकने का व्यर्थ प्रयत्न"
कबीर साहेब को मारने के लिए एक दिन शेखतकी ने सिपाहियों को आदेश दिया की कबीर साहेब को पेड़ से बांधकर शरीर पर बड़ी बड़ी कील ठोक दो। लेकिन जब कील ठोकने चले तो सिपाहियों के हाथ पैर काम करना बंद हो गए और वो वहाँ से भाग गए और शेखतकी को फिर परमात्मा कबीर साहेब के सामने लज्जित होना पड़ा।

(12)शेखतकी पीर ने कबीर साहेब को नीचा दिखाने के लिए 3 दिन के भंडारे की कबीर साहेब के नाम से सभी सभी आश्रमों में झूठी चिठ्ठी डलवाई थी कि कबीर जी 3 दिन का भंडारा करेंगे सभी आना भोजन के बाद एक मोहर, एक दोहर भी देंगे। कबीर साहेब ने 3 दिन का मोहन भंडारा भी करा दिया था और कबीर साहेब की महिमा भी हुई।

(13)"भूखा प्यासा मारने की चेष्टा"
एक दिन शेखतकी ने कबीर साहेब को नीम के पेड़ में लोहे के तार से बांधकर भूखा प्यासा छोड़ दिया और सोचा कि कबीर साहेब मर जाएंगे। लेकिन कबीर साहेब को कुछ नहीं हुआ और वो वापिस जीवित दरबार में पहुँच गए।
पानी से पैदा नहीं, स्वांसा नहीं शरीर।
अन्न आहार करता नहीं, ताका नाम कबीर।।

(14)"मुर्दे को जीवित करने की परीक्षा लेना"
दिल्ली के बादशाह सिकन्दर लोधी के पीर शेख तकी ने कहा कबीर जी को तब अल्लाह मानेंगे जब मेरी मरी हुई लड़की को जीवित कर देगा जो कब्र में दबी हुई है। कबीर परमेश्वर जी ने अपनी समर्थ शक्ति से हजारों लोगों के सामने उस लड़की को जीवित किया और उसका नाम कमाली रखा। कबीर परमेश्वर सर्वशक्तिमान हैं।

(15)"कबीर साहेब को जहरीले बिच्छू द्वारा मारने का प्रयास"
शेखतकी के आदेश पर सिपाही बहुत सारे बिच्छू टोकरी में भरकर सिकंदर लोधी राजा के दरबार में गए जहाँ कबीर साहेब सत्संग कर रहे थे फिर सिपाहियों ने कबीर साहेब पर बिच्छू छोड़ना शुरू कर दिया। लेकिन सभी बिच्छू कबीर साहेब तक पहुँचने से पहले ही विलीन हो गए।
यह देखकर सभी लोग हैरान हो गए और कबीर साहेब के जयकारे लगाने लगे

(16)"खूनी हाथी से मरवाने की व्यर्थ चेष्टा"
शेखतकी के कहने पर दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी ने कबीर परमेश्वर को खूनी हाथी से मरवाने की आज्ञा दे दी। शेखतकी ने महावत से कहकर हाथी को एक-दो शीशी शराब की पिलाने को कहा।
हाथी मस्ती में भरकर कबीर परमेश्वर को मारने चला। कबीर जी के हाथ-पैर बाँधकर पृथ्वी पर डाल रखा था। जब हाथी परमेश्वर कबीर जी से दस कदम (50 फुट) दूर रह गया तो परमेश्वर कबीर के पास बब्बर शेर खड़ा केवल हाथी को दिखाई दिया। हाथी डर से चिल्लाकर (चिंघाड़ मारकर) भागने लगा। परमेश्वर के सब रस्से टूट गए। उनका तेजोमय विराट रूप सिकंदर लोधी को दिखा। तब बादशाह ने कांपते हुए अपने गुनाह की माफी मांगी।

(17)दिल्ली के बादशाह सिकन्दर लोधी के पीर शेखतकी ने कहा कि अगर यह कबीर अल्लाह है तो इसकी परीक्षा ली जाए कोई मुर्दा जीवित करे। तब सर्वशक्तिमान कबीर परमात्मा ने दरिया में बहते आ रहे एक लडके के‌ शव को हजारों लोगों के सामने जीवित किया। उसका नाम कमाल रखा। कबीर परमेश्वर समर्थ भगवान हैं। पूर्ण परमात्मा ही मृत व्यक्ति को जीवित कर सकता हैं।

(18)शेखतकी ने जुल्म गुजारे, बावन करी बदमाशी,
खूनी हाथी के आगे‌ डालै, बांध जूड अविनाशी,
हाथी डर से भाग जासी, दुनिया गुण गाती है।
शेखतकी ने अविनाशी को मारने के लिए खूनी हाथी के आगे डाला। हाथी कबीर भगवान के पास जाते ही डर कर भाग गया। तब लोगों ने कबीर साहेब की जय-जय कार की। कबीर भगवान अविनाशी है।
जानने के लिए देखिए श्रद्धा टीवी दोपहर2:00बजे से3:00बजे तक
Saint Rampal Ji


5 June कबीर प्रकट दिवस

मगहर में भाईचारे की मिसाल!
हिन्दू व मुसलमानों के बीच धार्मिक सामंजस्य और भाईचारे की जो विरासत कबीर परमात्मा छोड़कर गए हैं उसे मगहर में आज भी जीवंत रूप में देखा जा सकता है।
मगहर में जहाँ कबीर परमेश्वर जी सशरीर सतलोक गए थे, वहां हिंदू-मुसलमानों के मंदिर और मजार 100-100 फुट की दूरी पर बने हुए हैं।
"कबीर, विहंसी कहयो तब तीनसै, मजार करो संभार।
हिन्दू तुरक नहीं हो, ऐसा वचन हमार।"
 #MagharLeela_Of_GodKabir

Thursday, May 28, 2020

5 June कबीर प्रकट दिवस

#GodKabir_Comes_In_4_Yugas
कबीर परमात्मा अन्य रूप धारण करके कभी भी प्रकट होकर अपनी लीला करके अन्तर्ध्यान हो जाते हैं। उस समय लीला करने आए परमेश्वर को प्रभु चाहने वाले श्रद्धालु नहीं पहचान पाते, क्योंकि सर्व महर्षियों व संत कहलाने वालों ने प्रभु को निराकार बताया है। वास्तव में परमात्मा आकार में है। मनुष्य सदृश शरीर युक्त है। 
जानने के लिए देखिए साधना टीवी शाम7:30से8:30तक

5जून कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस

"सृष्टि के उत्पत्ति कर्ता पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी" 
आदरणीय गरीबदास साहेब जी की अमृतवाणी में सृष्टी रचना का प्रमाण
आदि रमैणी (सद् ग्रन्थ पृष्ठ नं. 690 से 692 तक)
आदि रमैंणी अदली सारा। जा दिन होते धुंधुंकारा ।।
सतपुरुष कीन्हा प्रकाशा। हम होते तखत कबीर खवासा ।।
अर्थात पहले केवल अंधकार था तथा पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी सत्यलोक में तख्त पर विराजमान थे। हम वहाँ चाकर थे। परमात्मा ने ज्योति निरंजन को उत्पन्न किया। फिर उसके तप के प्रतिफल में इक्कीस ब्रह्मण्ड प्रदान किए। फिर माया (प्रकृति) की उत्पत्ति की।
जानने के लिए देखिए साधना टीवी शाम7:30से8:30तक

Tuesday, May 19, 2020

Shiksha paddati

शिक्षा का हमारे जीवन में बहुत महत्व है, शिक्षा जितनी आत्मनिर्भरता तथा कैरियर के लिए जरुरी है उतनी ही व्यक्तित्व के निर्माण के लिए आवशयक है । अच्छी शिक्षा प्राप्त करने वाला व्यक्ति एक अच्छे स्वस्थ समाज का निर्माण करने में सहायक है । प्रायः देखा जाता है जिस राष्ट्र में जितनी साक्षरता होती है वहाँ विकास द्रुतगति से होता है । शिक्षा हमे अच्छा नागरिक बनाने के साथ - साथ एक सफल व्यक्ति भी बनाती है, शिक्षा में गुरु की महवत्पूर्ण भूमिका होती है, माता - पिता के बाद यदि बच्चे किसी पे विश्वास कर सकते है तो वह है गुरु । गुरु एक बालक को उसके अंदर विद्यमान गुणों को निखारकर उँच्चाईयो तक ले जाता है ।

आजकल गुरु शिष्य परंपरा समाप्त हो गई है तथा शिक्षा का व्यवसायी करण होने से इसके स्तर में गिरावट आ गई है । आजकल शिक्षा का मतलब है पैसा दो और शिक्षा ग्रहण करें, बालक का विकास हो रहा है या नहीं, उसका रुझान किस ओर है, उसमे कितनी योग्यता है इस बात से स्कूलों का कोई सरोकार नहीं होता, वहाँ तो सिर्फ अपनी कर्त्तव्य पूर्ति की जाती है ।

इसका प्रमुख कारण है स्कूलों का निजीकरण, स्कूल अपने लाभ के लिए अधिक सोचते है, आजकल बच्चों पर पढ़ाई का भर बढ़ता जा रहा है ओर शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है, आज जगह - जगह बच्चों को टूशन पढ़ाने के लिए संस्थान खुलते जा रहे है ।

शिक्षा हमे अच्छे संस्कार देती है, नैतिकता देती है, समाज में मिल जुलकर रहना सिखाती है, आज जरुरत है ऐसे संस्थानों की जहाँ बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार उन्ही विषयों के बारे में  पढ़ाया जाए जहाँ वह आगे चलकर आत्मनिर्भर बन सके तथा उन्हें आर्थिक समस्याओं से न जूझना पड़े ।

अगर हम संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं के आधार पर चले तो शिक्षा संबंधी समस्याओं से निजात मिल सकती है क्योंकि संत रामपाल जी महाराज आध्यात्मिकता से शिक्षा को जोडने पर बल देते हैं जिससे बच्चों में शारीरिक, मानसिक व सामाजिक विकास होता है तथा बच्चों में संस्कार की भावना प्रबल होती है।
जानने के लिए देखिए साधना टीवी शाम7:30बजे से

Wednesday, May 13, 2020

विवाह कैसे करें?

 विवाह कैसे करें‘‘
जैसे श्री देवी दुर्गा जी ने अपने तीनों पुत्रों (श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी तथा
श्री शिव जी) का विवाह किया था,  संत रामपाल जी महाराज के
अनुयाई ऐसे ही करते हैं। 17 मिनट की असुर निकंदन रमैणी है। फेरों के स्थान
पर उसको बोला जाता है जो करोड़ गायत्री मंत्र (¬ भूर्भवः ...) से उत्तम तथा
लाभदायक है। जिसमें विश्व के सर्व देवी-देव तथा पूर्ण परमात्मा का आह्वान तथा
स्तुति-प्रार्थना है। जिस कारण से सर्व शक्तियां उस विवाह वाले जोड़े की सदा रक्षा
तथा सहायता करते हैं। इससे बेटी बची रहेगी। जीने की सुगम राह हो जाएगी।
विवाह में प्रचलित वर्तमान परंपरा का त्याग :-
विवाह में व्यर्थ का खर्चा त्यागना पड़ेगा। जैसे बेटी के विवाह में बड़ी बारात
का आना, दहेज देना, यह व्यर्थ परंपरा है। जिस कारण से बेटी परिवार पर भार
मानी जाने लगी है और उसको गर्भ में ही मारने का सिलसिला शुरू है जो
माता-पिता के लिए महापाप का कारण बनता है। बेटी देवी का स्वरूप है। हमारी
कुपरम्पराओं ने बेटी को दुश्मन बना दिया। श्री देवीपुराण के तीसरे स्कंद में प्रमाण
है कि इस ब्रह्माण्ड के प्रारम्भ में तीनों देवताओं (श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी तथा
श्री शिव जी) का जब इनकी माता श्री दुर्गा जी ने विवाह किया, उस समय न कोई बाराती था, न कोई भाती था। न कोई भोजन-भण्डारा किया गया था। न डी.जे.
बजा था, न कोई नृत्य किया गया था। श्री दुर्गा जी ने अपने बड़े पुत्र श्री ब्रह्मा
जी से कहा कि हे ब्रह्मा! यह सावित्री नाम की लड़की तुझे तेरी पत्नी रूप में दी
जाती है। इसे ले जाओ और अपना घर बसाओ। इसी प्रकार अपने बीच वाले पुत्र
श्री विष्णु जी से लक्ष्मी जी तथा छोटे बेटे श्री शिव जी को पार्वती जी को देकर कहा
कि ये तुम्हारी पत्नियां हैं। इनको ले जाओ और अपना-अपना घर बसाओ। तीनों
अपनी-अपनी पत्नियों को लेकर अपने-अपने लोक में चले गए जिससे विश्व का
विस्तार हुआ।
शंका समाधान :- कुछ व्यक्ति कहते हैं कि पार्वती जी की मृत्यु हो गई थी।
उस देवी का पुनर्जन्म राजा दक्ष के घर हुआ था। युवा होने पर देवी सती (पार्वती)
जी ने नारद के बताने के पश्चात् श्री शिव जी को पति बनाने का दृढ़ संकल्प कर
लिया और अपनी माता जी के माध्यम से अपनी इच्छा पिता दक्ष को बताई तो राजा
दक्ष ने कहा कि वह शिव जी मेरा दामाद बनने योग्य नहीं है क्योंकि वह नग्न रहता
है। केवल एक मृगछाल परदे पर बाँधता है। शरीर पर राख लगाकर भांग के नशे
में रहता है। सर्पों को साथ रखता है। ऐसे व्यक्ति से मैं अपनी बेटी का विवाह करके
जगत में हँसी का पात्र नहीं बनूंगा। परंतु देवी पार्वती भी जिद की पक्की थी। उसने
अपनी इच्छा श्री शिव जी के पास भिजवा दी और कहा कि मैं आपसे विवाह करना
चाहती हूँ। राजा दक्ष ने पार्वती जी का विवाह किसी अन्य के साथ निश्चित कर
रखा था। उसी दिन श्री शिव जी अपने साथ हजारों की सँख्या में भूत-प्रेत, भैरव
तथा अपने गणों को लेकर विवाह मंडप पर पहुँच गए। राजा दक्ष के सैनिकों ने
विरोध किया। शिव की सेना और दक्ष की सेना में युद्ध हुआ। पार्वती ने शिव जी
को वरमाला पहना दी। पार्वती को बलपूर्वक लेकर श्री शिव जी कैलाश पर्वत पर
अपने घर ले गए। कुछ व्यक्ति कहते हैं कि देखो! श्री शिव जी भी भव्य बारात लेकर
पार्वती से विवाह करने आए थे। इसलिए बारात की परंपरा पुरातन है। इसलिए
बारात बिना विवाह की शोभा नहीं होती। इसका उत्तर यह है कि यह विवाह नहीं
था, यह तो प्रेम प्रसंग था। श्री शिव जी बारात नहीं सेना लाए थे पार्वती को
बलपूर्वक उठाकर ले जाने के लिए। विवाह की पुरातन परम्परा श्री देवी महापुराण
के तीसरे स्कंद में है जो ऊपर बता दी है। बेटियों तथा बेटों को चाहिए कि अपने
माता-पिता जी की इच्छानुसार विवाह करें। प्रेम विवाह महाक्लेश का कारण बन
जाता है। जैसे भगवान शिव जी और पार्वती जी का किसी बात पर मन-मुटाव हो
गया। शिव जी ने पार्वती जी से पत्नी व्यवहार बंद कर दिया तथा बोलचाल भी
बंद कर दी। पार्वती ने सोचा कि अब यह घर मेरे लिए नरक हो गया है। इसलिए
कुछ दिन अपनी माँ के पास चली जाती हूँ। पार्वती जी अपने पिता दक्ष के घर
मायके में चली गई। उस दिन राजा दक्ष ने एक हवन यज्ञ का आयोजन किया हुआ
था। राजा दक्ष ने अपनी बेटी का सत्कार नहीं किया तथा कहा कि आज क्या लेने
आई हो? देख लिया उसका प्रेम, चली जा घर से। पार्वती जी ने अपनी माता से श्री शिव जी के नाराज होने की कथा बता दी थी। माता ने अपने पति दक्ष को
सब बताया था। पार्वती जी को अब न मायके में स्थान था, न ससुराल में। प्रेम
विवाह ने ऐसी गंभीर परिस्थिति उत्पन्न कर दी कि दक्ष पुत्री को आत्महत्या के
अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं देखा और राजा दक्ष के विशाल हवन कुण्ड में जलकर
मर गई। धार्मिक अनुष्ठान का नाश किया। अपना अनमोल मानव जीवन खोया।
पिता का नाश कराया क्योंकि जब श्री शिव जी को पता चला तो वे अपनी सेना
लेकर पहुँचे और अपने ससुर दक्ष जी की गर्दन काट दी। बाद में बकरे की गर्दन
लगाकर जीवित किया। उस प्रेम विवाह ने कैसा घमासान मचाया। शिव सेना को
बारात बताकर कुप्रथा को जन्म दिया गया है और यह प्रसंग प्रेम विवाह रूपी
कुप्रथा का जनक है जो समाज के नाश का कारण है।
विवाह जो सुप्रथा से हुआ, वह आज तक सुखी जीवन जी रहे हैं। जैसे श्री
ब्रह्मा जी तथा श्री विष्णु जी।
विवाह करने का उद्देश्य :- विवाह का उद्देश्य केवल संतानोत्पत्ति करना है।
फिर पति-पत्नी मिलकर परिश्रम करके बच्चों का पालन करते हैं। उनका विवाह
कर देते हैं। फिर वे अपना घर बसाते हैं। इसके अतिरिक्त प्रेम विवाह समाज में
अशांति का बीज बोना है। समाज बिगाड़ की चिंगारी है
प्रेम विवाह से बचे और माँ बाप की इच्छानुसार शादी करे जैसे संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी करते हैं
आऔ समाज सुधार मे भागीदार बने और लडकियों का जीवन सुरक्षित करें।
जानने के लिए देखिए साधना टीवी शाम7:30से8:30तक

Thursday, May 7, 2020

कबीर साहेब जी ही पूर्ण परमेश्वर है।

परमात्मा का नाम कबीर (कविर देव) है। - पवित्र अथर्ववेद काण्ड 4 अनुवाक 1 मंत्र 7
जानने के लिए देखिए श्रद्धा टीवी दोपहर2:00बजे से3:00बजे तक

शराब पीने वाले का शरीर रोंगों की खान बन जाता है।

शराब में ऐसा नशा है जो अनमोल मानव जीवन को बर्बाद कर देती है। सद्भगति में ऐसा नशा है जो मर्यादा में रहकर की जाए तो जीवन को आबाद कर देती है। फैसला आपको करना है।
जानने के लिए देखिए साधना टीवी शाम7:30से8:30तक

Wednesday, May 6, 2020

नशा जीवन का नाश करता है।

शराबी व्यक्ति विचार करें
आज किसी की भी संतान उस समय बहुत गर्व महसूस करती है जब उसे अपने स्वावलंबी पिता का परिचय देना हो।
शराबी परिजन का परिचय देने में बच्चे हीन भावना का शिकार होते हैं।
Dooni tonk Rajasthan

Motivational thought

भीड़ हमेशा उस रास्ते पर चलती है जो रास्ता आसान लगता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं की भीड़ हमेशा सही रास्ते पर चलती है| अपने रास्ते खुद चुनिए क्योंकि आपको आपसे बेहतर और कोई नहीं जानता|
Location-Dooni,Tonk,Raj.india

महामारी क्यों आती है?

प्रस्तावना जब किसी रोग का प्रकोप कुछ समय पहले की अपेक्षा बहुत अधिक होता तो उसे 'महामारी कहते हैं। महामारी किसी एक स्थान पर सीमित होती है...