कबीर परमात्मा अन्य रूप धारण करके कभी भी प्रकट होकर अपनी लीला करके अन्तर्ध्यान हो जाते हैं। उस समय लीला करने आए परमेश्वर को प्रभु चाहने वाले श्रद्धालु नहीं पहचान पाते, क्योंकि सर्व महर्षियों व संत कहलाने वालों ने प्रभु को निराकार बताया है। वास्तव में परमात्मा आकार में है। मनुष्य सदृश शरीर युक्त है।
महामारी क्यों आती है?
प्रस्तावना जब किसी रोग का प्रकोप कुछ समय पहले की अपेक्षा बहुत अधिक होता तो उसे 'महामारी कहते हैं। महामारी किसी एक स्थान पर सीमित होती है...
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माता पिता हमारे लिए आदरणीय है माता-पिता भगवान नहीं। क्योंकि माता पिता हमें हर जन्म में मिल जाते हैं आप गधे की यौनी मे जाओगे आपको वहां भी मा...
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शराब में ऐसा नशा है जो अनमोल मानव जीवन को बर्बाद कर देती है। सद्भगति में ऐसा नशा है जो मर्यादा में रहकर की जाए तो जीवन को आबाद कर देती है। ...