शिक्षा का हमारे जीवन में बहुत महत्व है, शिक्षा जितनी आत्मनिर्भरता तथा कैरियर के लिए जरुरी है उतनी ही व्यक्तित्व के निर्माण के लिए आवशयक है । अच्छी शिक्षा प्राप्त करने वाला व्यक्ति एक अच्छे स्वस्थ समाज का निर्माण करने में सहायक है । प्रायः देखा जाता है जिस राष्ट्र में जितनी साक्षरता होती है वहाँ विकास द्रुतगति से होता है । शिक्षा हमे अच्छा नागरिक बनाने के साथ - साथ एक सफल व्यक्ति भी बनाती है, शिक्षा में गुरु की महवत्पूर्ण भूमिका होती है, माता - पिता के बाद यदि बच्चे किसी पे विश्वास कर सकते है तो वह है गुरु । गुरु एक बालक को उसके अंदर विद्यमान गुणों को निखारकर उँच्चाईयो तक ले जाता है ।
आजकल गुरु शिष्य परंपरा समाप्त हो गई है तथा शिक्षा का व्यवसायी करण होने से इसके स्तर में गिरावट आ गई है । आजकल शिक्षा का मतलब है पैसा दो और शिक्षा ग्रहण करें, बालक का विकास हो रहा है या नहीं, उसका रुझान किस ओर है, उसमे कितनी योग्यता है इस बात से स्कूलों का कोई सरोकार नहीं होता, वहाँ तो सिर्फ अपनी कर्त्तव्य पूर्ति की जाती है ।
इसका प्रमुख कारण है स्कूलों का निजीकरण, स्कूल अपने लाभ के लिए अधिक सोचते है, आजकल बच्चों पर पढ़ाई का भर बढ़ता जा रहा है ओर शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है, आज जगह - जगह बच्चों को टूशन पढ़ाने के लिए संस्थान खुलते जा रहे है ।
शिक्षा हमे अच्छे संस्कार देती है, नैतिकता देती है, समाज में मिल जुलकर रहना सिखाती है, आज जरुरत है ऐसे संस्थानों की जहाँ बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार उन्ही विषयों के बारे में पढ़ाया जाए जहाँ वह आगे चलकर आत्मनिर्भर बन सके तथा उन्हें आर्थिक समस्याओं से न जूझना पड़े ।
अगर हम संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं के आधार पर चले तो शिक्षा संबंधी समस्याओं से निजात मिल सकती है क्योंकि संत रामपाल जी महाराज आध्यात्मिकता से शिक्षा को जोडने पर बल देते हैं जिससे बच्चों में शारीरिक, मानसिक व सामाजिक विकास होता है तथा बच्चों में संस्कार की भावना प्रबल होती है।
जानने के लिए देखिए साधना टीवी शाम7:30बजे से
आजकल गुरु शिष्य परंपरा समाप्त हो गई है तथा शिक्षा का व्यवसायी करण होने से इसके स्तर में गिरावट आ गई है । आजकल शिक्षा का मतलब है पैसा दो और शिक्षा ग्रहण करें, बालक का विकास हो रहा है या नहीं, उसका रुझान किस ओर है, उसमे कितनी योग्यता है इस बात से स्कूलों का कोई सरोकार नहीं होता, वहाँ तो सिर्फ अपनी कर्त्तव्य पूर्ति की जाती है ।
इसका प्रमुख कारण है स्कूलों का निजीकरण, स्कूल अपने लाभ के लिए अधिक सोचते है, आजकल बच्चों पर पढ़ाई का भर बढ़ता जा रहा है ओर शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है, आज जगह - जगह बच्चों को टूशन पढ़ाने के लिए संस्थान खुलते जा रहे है ।
शिक्षा हमे अच्छे संस्कार देती है, नैतिकता देती है, समाज में मिल जुलकर रहना सिखाती है, आज जरुरत है ऐसे संस्थानों की जहाँ बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार उन्ही विषयों के बारे में पढ़ाया जाए जहाँ वह आगे चलकर आत्मनिर्भर बन सके तथा उन्हें आर्थिक समस्याओं से न जूझना पड़े ।
अगर हम संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं के आधार पर चले तो शिक्षा संबंधी समस्याओं से निजात मिल सकती है क्योंकि संत रामपाल जी महाराज आध्यात्मिकता से शिक्षा को जोडने पर बल देते हैं जिससे बच्चों में शारीरिक, मानसिक व सामाजिक विकास होता है तथा बच्चों में संस्कार की भावना प्रबल होती है।
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